घोंसले को देखकर थाह ना लगा हमारी
एक - एक कर जोङा है तिनका - कठारी,
बिखरे सही उजङे ही सही
पर लगन से बनाया हैं यही,
है कमाई सुबह से सांझ की
इसमें लागत नहीं है रात की,
तभी तो टिकी हुई है ऊँचाई पर घास - पात
कई महलों पेङो पर ये नन्हीं - सी बिसात,
ना डर है किसी लुटेरे का
ना ही किसी ठगैरे का,
क्योंकि वह तो है बस रात का डेरा
सुबह होते ही बनते हम जस ठठेरा,
घोंसले को देखकर थाह ना लगा हमारी
हवेली से ऊंची है घास - पात की यह दुनियादारी
एक - एक कर जोङा है तिनका - कठारी
घोंसले को देखकर थाह ना लगा हमारी.
एक - एक कर जोङा है तिनका - कठारी,
बिखरे सही उजङे ही सही
पर लगन से बनाया हैं यही,
है कमाई सुबह से सांझ की
इसमें लागत नहीं है रात की,
तभी तो टिकी हुई है ऊँचाई पर घास - पात
कई महलों पेङो पर ये नन्हीं - सी बिसात,
ना डर है किसी लुटेरे का
ना ही किसी ठगैरे का,
क्योंकि वह तो है बस रात का डेरा
सुबह होते ही बनते हम जस ठठेरा,
घोंसले को देखकर थाह ना लगा हमारी
हवेली से ऊंची है घास - पात की यह दुनियादारी
एक - एक कर जोङा है तिनका - कठारी
घोंसले को देखकर थाह ना लगा हमारी.
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