Saturday, 5 September 2015

गुरु गुण की गाथा ---------------- तुम ही तो हो ब्रह्माण्ड के रचनाकार हो तुम ही आदर्श जीवन के सदविचार हैं गुरु करम को , शत - शत नमन नमस्कार ।।


गुरु तुम सारे गुण में हो
अन्नत से लेकर , शून्य में हो
तुम ही तो हो एक सच्चा धर्म
और हर पुण्य के कर्म में हो
गुरु तुम सारे गुण में हो ,

काले स्लेट पर ऊजला ज्ञान
कोरे मन में प्रज्वलित ध्यान
लटपटाती लबों को अचूक कमान
बिखरे शब्दों को अर्थकारी पहचान
ना होते तुम तो रवि रहता अंधयान
और रहती वसुधा बस बंजरबान ,

तुम हो तो यह " रणवीरा " हैं
और बनी हैं कविता सुरवान
तुम हो महान से भी महान
तुम ही तो हो ब्रह्माण्ड के रचनाकार
हो तुम ही आदर्श जीवन के सदविचार
हैं गुरु करम को , शत - शत नमन नमस्कार ।।