Monday, 7 March 2016

रंगीन निशान हैं अब मोहब्बत के ऊपर (कविता)

रंगीन दुनिया में बिकती मोहब्बत के नाम पर 
रंगीन गुङिया रंगीन फूल 
वो फूल जो महक से परे हैं 
वो गुङिया जो चहक से परे हैं 
पर मोहब्बत के नाम पर, मोहब्बत के नाम हैं सिर्फ़ 
वरना मोहब्बत को जताने की क्या जरूरत 
दिल से प्यार दिखाने की क्या जरूरत  
क्योंकि मोहब्बत कोई जरूरत नहीं हैं 
और जो जरूरत है वो मोहब्बत नहीं, 
यह मोहब्बत नहीं जो तब्दील हैं रंगीन लिबासो में 
बस फरेब है नशीली साँसों में , पत्थरीली आँखों में 
मोहब्बत तो मिलती ही झोपड़ी के रातों में 
सब थोङे - थोङे बांट कर खुश हैं रातों में 
बिना किसी फुल बिना किसी हुलगुल 
दिखता है माँ बेटे का प्यार पति का पुलकार 
बिना कोई दिन बिना किसी तालमेल के रंगीन 
चौक - चौराहे पर रेलों में देखो 
पीठ पर बाँधे बिना रिश्ते की बोझ 
बाँट रही है बस प्यार के दो बोल 
पर दुनिया को यकीन नहीं होता है उस पर 
क्योंकि रंगीन निशान हैं अब मोहब्बत के ऊपर.

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