Wednesday, 12 August 2015

ऊर्जा कहूँ कि सुर्या (कविता ) ( माननीय भूतपूर्व राष्ट्रपति डाॅ . एपीजे अब्दुल कलाम के लिए समर्पित शब्दो की श्रध्दांजलि )

ऊर्जा कहूँ कि सुर्या (कविता ) 

( माननीय भूतपूर्व राष्ट्रपति डाॅ . एपीजे अब्दुल कलाम के लिए समर्पित शब्दो की श्रध्दांजलि )
वर्तमान का रख कर ध्यान
भविष्य का देते थे ज्ञान
थी लबों पर सरस्वती की बान
हौसले  को देते चले उङान
देश को बना चले  ऊर्जावान
शत् - शत् नमन, है हमारे सुर्यावान
उम्र को दे कर गए मात
अंत तक रहे युवाओं के साथ ,
मिट्टी के बने, मिट्टी के लिये चले
भारत के रत्न, भारत को प्रयत्न दे चले ,
खोया है हमने देश का धङकन
पर भर कर गए है युवा मार्गदर्शन
तिरंगा भी दिया है कराह
गर्व की दे राह , पर दिल मे बसी रहेगी आह ,
भूलेगा ना आपको जहान
महान से भी आप रहोगे महान
ऊर्जा से ज्यादा ऊर्जावान
शत् - शत् नमन , है हमारे सुर्यावान ।।

यह अंतिम विदाई नही ( कविता) यह अंतिम विदाई नहीं देश सपूत की सगाई है बस जिंदा रहो मिसाल बन के इसलिए जन - सैलाब उमङ आई है,

यह अंतिम विदाई नही ( कविता)


यह अंतिम  विदाई नहीं
देश सपूत की सगाई है
बस जिंदा रहो मिसाल बन के
इसलिए जन - सैलाब उमङ आई है,
इन आँखों की नमी पर ना जाओ
इसके जरिए गंगा चलकर छाई है
कर्म को बना देंगे अब धर्म
चमन से यह खबर आई है,
कलाम कलम से लेकर मिसाइल तक
रामेश्वरम से लेकर जन - जन के भलाई तक
आप थे और रहोगे जिंदा मार्गदर्शन बनकर
लहराते तिरंगे  से भी यही खूशबू आई है
यह अंतिम विदाई नही
देश सपूत की सगाई है ।।