खुलती नहीं आँख बिना पलकें उठाएं
चूङीयाँ भी खनकती नहीं बिना खनकाएं
खुलती नहीं आँख बिना पलकें उठाएं
चल उठ कर खुद के भरोसे
पैरों के साथ रस्ते - रस्ते
क्योंकि मिलती नहीं मंजिल
बिना राह में दिन-रात बिताएं
उङते धूल बस यही दुहरायें
चला कर राही सपने बसाएं
ठोकर का भय दिल से भगाएँ
बने गड्ढे यही बताएं
दर्द ही दवा का मोल समझाएं
चला कर राही मन का ललक जलाएं
ठोकर का भय दिल से भगाएँ
चला कर राही मन में अग्न जलाएं.
चूङीयाँ भी खनकती नहीं बिना खनकाएं
खुलती नहीं आँख बिना पलकें उठाएं
चल उठ कर खुद के भरोसे
पैरों के साथ रस्ते - रस्ते
क्योंकि मिलती नहीं मंजिल
बिना राह में दिन-रात बिताएं
उङते धूल बस यही दुहरायें
चला कर राही सपने बसाएं
ठोकर का भय दिल से भगाएँ
बने गड्ढे यही बताएं
दर्द ही दवा का मोल समझाएं
चला कर राही मन का ललक जलाएं
ठोकर का भय दिल से भगाएँ
चला कर राही मन में अग्न जलाएं.
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