एक - एक कर गिर गए पत्ते पतझड़ में
पर डाल कोई झुका नहीं
बस सहता रहा मार समय की
पर जङ से अपने हिला नहीं
चली आँधियां, आई तूफान
और साथ ना दी जमीनी जान
मिट्टीयों के चिथङे - चिथङे थे, उखड़े जहां
पर तन से जङ कटा नहीं
डाल से पत्ता हटा नहीं
भले ही मर गया वह पेङ पुराना
पर दे चला नया जंगल जहान
पेङ है पर पैरों वालों से महान
जंगल से हैं ये जहान
ए! पेङ तुझे नतमस्तक प्रणाम
पर डाल कोई झुका नहीं
बस सहता रहा मार समय की
पर जङ से अपने हिला नहीं
चली आँधियां, आई तूफान
और साथ ना दी जमीनी जान
मिट्टीयों के चिथङे - चिथङे थे, उखड़े जहां
पर तन से जङ कटा नहीं
डाल से पत्ता हटा नहीं
भले ही मर गया वह पेङ पुराना
पर दे चला नया जंगल जहान
पेङ है पर पैरों वालों से महान
जंगल से हैं ये जहान
ए! पेङ तुझे नतमस्तक प्रणाम

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