Sunday, 1 February 2015

टूटता - लोकतंत्र {कविता}

          टूटता - लोकतंत्र 

वादों की ले झूठी तलवार
गरीबो को ना भरमाओ सरकार
पहन के तुम सफ़ेद चोला
लोकतंत्र पर ना करो प्रहार

गली - गली ना बदलो भाषा
ना तुम तोड़ो समाजवाद की आशा
संविधान को ना बनाओ बाजार
लोकतंत्र पर ना करो प्रहार.

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