सफेदराम की चिट्ठी काले काका के नाम
काले काका
सादर प्रणाम ,
तड़ा - तड़ सुनिये मेरा परिणाम,
बहुत दुःख के साथ यह खत लिख रहा हूँ की अब मैं आपको नहीं बचा सकता हूँ क्यूँकि अब मेरे सफ़ेद कपडे गरीबो के आंसुओ से भींग रहे हैं और मेरा कलूटा बदन अपना रंग दिखा दिया हैं। इनकी चित्कार भारत को चीरकर स्वीटनगरी को जा चुकी हैं ,जो की आप भी सुनकर भयाकुल हो गए हैं।
अब मेरी उमर भी अच्छे से निकल गयी और बच्चे भी पढ़ - लिखकर अच्छे पद पर हो गए हैं यानि की इस काले कमाई की सफ़ेद उपजाई हो चूकी हैं। अब आगे के बारे में मेरे बेटा - बेटी सोचेंगे क्यूँकि उन सबका भी मैनेजमेंट बचपन से ही ठीक - ठाक हैं।
अब आप भी स्वीस के चादर से मुक्त हो जाइये। अफ़सोस की मुझे यह रिश्ता तोडना पड़ा और रिश्ता तोडना तो हमारा खानदानी वसूल हैं।
> आपका था अपना
सफ़ेद राम फेँकू
पता - राजनीत नगरीया ,भूल -भूलैया डगरिया
गली no. - नौ दो ग्यारह \चार सौ बीस
writer
-रवि कुमार गुप्ता
M .A . in Journalism & Mass Comm. {1st year }
Central University of Orissa
Mob. no.- 9006944111, 09778022524
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