शब्दों से सफाई
बाद आजादी के शुरू हुई एक और लड़ाई
बापू ने सु -स्वस्थ भारत की राह दिखाई
जब तक थे हरा-रंग चहुँ ओर छाई
फिर हो गयी शुरू बस शब्दों से सफाई ,
कचरा -कचरा बस कचरा-डगर हो गया
बदबूं में सब कुंभकर्ण -सा सो गया
बीमारी बन के जब-जब सितम आई
बापू की बात तब-तब ही याद आई
फिर हो गयी शुरू बस शब्दों से सफाई ,
खुद हे कचरा हम खूब हैं बनाते
दिखा के झाड़ू तस्वीर हैं खिंचाते
बुरा न मानों पर ये क्या हैं भाई
आखिर कचरा तो हमने थैली में ही उठाई
और नाली को ले जा नदी में मिलाई
अच्छा हैं साठ -सालों बाद भी नींद भाग गए
जो थे सु -स्वप्न हमारे अब जाग गए
पर सच में लड़नी हैं कचरे से लड़ाई
तो बनानी हैं कचरा मिटाने की दवाई
या अब भी करनी हैं शब्दों से सफाई।
-रवि कुमार गुप्ता "रणवीरा "
ऍम.ए.. इन जर्नलिज्म एण्ड मास कम्युनिकेशन
केंद्रीय विश्व्विद्यालय ,ओड़िसा
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